रवीश कुमार का प्राइम टाइम : ताजिंदगी विभाजन की लकीर को पाटते रहे दिलीप कुमार
Listen now
Description
अपनी गैर हाजिरी में इससे अधिक कोई हाजिर क्या हो सकता है? कि आप उन्हें अलविदा कहते वक्त इस तरह से याद किये जा रहे हैं, जैसे वो लौट कर आए हों. एक देश जो हर वक्त हिंदू-मुसलमान के बीच नफरत की तलवार पर चल रहा होता है. उस देश में ऐसा एक ही शख्स था, जो दिलीप कुमार भी था और यूसुफ खान भी. 1947 के विभाजन रेखा को वो जिस आसानी से पाट दिया करते थे. बहुत कम लोगों में वैसी कुबत होती है. उनका एक मकान “फूलों का शहर” पेशावर में आज भी है.
More Episodes
पीएम नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय पहली मुलाकात व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से हुई. हमने देखा कि किस तरह से उनके साथ वरिष्ठ अधिकारी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारतीय राजदूत साथ में हैं. इसके अलावा एनएसए भी साथ में हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति से पीएम मोदी की मुलाकात 8:30 बजे तय हुई थी....
Published 09/24/21
भारतीय रिजर्व बैंक और संसद की स्थायी समिति के अनुसार प्रति व्यक्ति आय के मामले में उत्तर प्रदेश और बिहार की हालत बहुत खराब है. ये दोनों ही राज्य सबसे नीचे हैं. भूगोल और आबादी के हिसाब से भी भारत के इन दो बड़े राज्यों में अगर लोगों की कमाई इतनी कम है, तो आप समझ सकते हैं कि जीवन स्तर का क्या हाल होगा?
Published 09/23/21
ऐसे बहुत से लोग हैं, जो बैंकों में बचत पर मिलने वाले ब्याज से अपना खर्च चलाते हैं. या एक निश्चित सी कमाई होती है और ज्यादातर मामलों में बहुत सीमित भी. अब अगर ये कमाई भी घटने लगे, माइनस में चली जाए तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि गोदी मीडिया पर भारत को सुपर पावर बताने की होड़ क्यों मची है?
Published 09/22/21