उपशम
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‘यथार्थ गीता’ एक क्रियानिष्ट महापुरुष द्वारा भगवान के निर्देशन पर की गई गीता की प्रत्यक्षानुभूत व्याख्या है। कई मूल प्रश्न जैसे कर्म, यज्ञ, वर्ण, वर्ण संकर, युद्ध, शरीर यात्रा, देवता, अवतार इत्यादि का स्पष्टीकरण केवल इसी टीका में देखने को मिलता है। यथार्थ गीता की चार छः आवृत्ति श्रद्धापूर्वक करते ही आप पायेंगे कि वह परमात्मा आपका मार्ग दर्शन करने लगा है। #Krishna #Mahabharata #Yoga #Meditation
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श्रीकृष्ण जिस स्तर की बात करते हैं, क्रमश: चलकर उसी स्तर पर खड़ा होनेवाला कोई महापुरुष ही अक्षरश: बता सकेगा कि श्रीकृष्ण ने जिस समय गीता का उपदेश दिया था, उस समय उनके मनोगत भाव क्या थे? मनोगत समस्त भाव कहने में नहीं आते। कुछ तो कहने में आ पाते हैं, कुछ भाव-भंगिमा से व्यक्त होते हैं और शेष पर्याप्त...
Published 01/31/17
श्रीमद्भगवद्गीतारूपी उपनिषद् एवं ब्रह्मविद्या तथा योगशास्त्र विषयक श्रीकृष्ण और अर्जुन सम्वाद ‘संशय-विषाद योग’ नामक प्रथम अध्याय। #Krishna #Mahabharata #Yoga #Meditation
Published 01/31/17
Published 01/31/17