रवीश कुमार का प्राइम टाइम: क्या यूपी सरकार ने कोरोना संकट में वाकई अभूतपूर्व काम किया?
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एक पाठक के रूप में आपका कर्तव्य बनता है कि जब सरकार करोड़ों रुपये ख़र्च कर अपने काम के बारे में विज्ञापन छपवाए तो उसे ग़ौर से पढ़ें। यह आपका ही पैसा है. आपके टैक्स के पैसे से सिर्फ जे एन यू नहीं चलता है, सरकारी विज्ञापन भी छपते हैं. आज यूपी के अखबारों में प्रधानंमत्री के दौरे को लेकर पूरे पन्ने का वृहद विज्ञापन छपा. इस विज्ञापन से वाराणसी में हो रहे कार्यों की जानकारी तो मिली ही,साथ ही यह भी पता चला कि कार्यक्रमों के वर्गीकरण और भाषा में किस तरह के बदलाव आ रहे हैं. मुमकिन है ऐसे बदलाव कई साल पहले आ चुके हों लेकिन मेरी नज़र आज पड़ी है. इसके लिए माफी चाहूंगा.
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भारतीय रिजर्व बैंक और संसद की स्थायी समिति के अनुसार प्रति व्यक्ति आय के मामले में उत्तर प्रदेश और बिहार की हालत बहुत खराब है. ये दोनों ही राज्य सबसे नीचे हैं. भूगोल और आबादी के हिसाब से भी भारत के इन दो बड़े राज्यों में अगर लोगों की कमाई इतनी कम है, तो आप समझ सकते हैं कि जीवन स्तर का क्या हाल होगा?
Published 09/23/21
ऐसे बहुत से लोग हैं, जो बैंकों में बचत पर मिलने वाले ब्याज से अपना खर्च चलाते हैं. या एक निश्चित सी कमाई होती है और ज्यादातर मामलों में बहुत सीमित भी. अब अगर ये कमाई भी घटने लगे, माइनस में चली जाए तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि गोदी मीडिया पर भारत को सुपर पावर बताने की होड़ क्यों मची है?
Published 09/22/21
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Published 09/21/21