रवीश कुमार का प्राइम टाइम : नफ़रत के नारों का जंतर-मंतर, घुल चुका है ज़हर गांव-शहर
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संसद चल रही है और उसके बिल्कुल पास में रविवार के दिन जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोग जमा होते हैं और वहां एक समुदाय विशेष के ख़िलाफ़ भड़काऊ नारे लगाते हैं. इस घटना में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट के वकील और दिल्ली बीजेपी के पूर्व प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय भी हैं. अश्विनी उपाध्याय भाजपा के सदस्य भी हैं. भारत जोड़ो के नाम पर रविवार को बुलाई गई इस सभा में भारत तोड़ने के नारे लगे. कानून के नाम पर उन मुद्दों पर बातें हुई जिनके बहाने अक्सर सांप्रदायिक बातें भी होती हैं. भारत जोड़ो आंदोलन की प्रवक्ता शिप्रा श्रीवास्तव ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि पांच हज़ार लोग मौजूद थे. किसी कोने से पांच छह लोगों ने ऐसे नारे लगा दिए जिनसे हम खुद को अलग करते हैं. जबकि वहां कवर करने गए नेशनल दस्तक के पत्रकार अनमोल प्रीतम ने न्यूज़ लौंड्री से कहा है कि दो ढाई सौ लोग नफ़रती नारे लगा रहे हैं. मुसलमानों के बारे में हिंसक बातें कह रहे थे. इस देश के किसानों को जंतर मंतर पर संसद का आयोजन करने के लिए दो सौ से अधिक किसानों के अनुमति नहीं दी जाती है लेकिन हज़ारों लोगों को कैसे जमा होने दिया गया? हमारे सहयोगी मुकेश सिंह सेंगर का कहना है कि पुलिस ने इजाज़त नहीं दी थी तब भी इतने लोग आए. राहुल गांधी ट्रैक्टर से संसद आ गए तो ट्रैक्टर कैसा आ गया और इसका मालिक कौन है, जिस ट्रक से आया उस ट्रक का मालिक कौन है. इसकी तक जांच हो गई लेकिन किसी धर्म के खिलाफ दंगाई नारे लगाने वाले थोड़े थोड़े समय पर जमा हो जाते हैं.
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जिस देश में आजादी की लड़ाई का आंदोलन 1857 से 1947 तक अलग-अलग रूप में चला हो, उस देश के सुप्रीम कोर्ट में शाहीन बाग धरने के बाद किसानों के धरने को लेकर चल रही बहस में अजीब-अजीब किस्म के सवाल उठ रहे हैं, कि आंदोलन कब तक चलेगा? क्यों चल रहा है?
Published 10/20/21
जम्मू कश्मीर में क्या हो रहा है, यह जानना होगा तो आप किसी न किसी से पूछेंगे. सेना और पुलिस के बयान से किसी घटना की जानकारी मिलती है लेकिन राजनीतिक तौर पर कश्मीर के भीतर क्या हो रहा है इसकी आवाज़ तो उन्हीं से आएगी जिनकी जवाबदेही है. इतना कुछ हो रहा है फिर भी कश्मीर पर कोई विस्तृत प्रेस कांफ्रेंस...
Published 10/19/21
बहुत जरूरी है कि हम उस उचित स्थान को तय कर दें जिसके न मिलने पर आए दिन राजनीति होती है. तय किया जाना चाहिए कि उचित स्थान का क्या मतलब है और ये कहां पर होता है. इतिहास के जिस मुद्दे को इतिहास की कक्षा में उचित स्थान मिलना चाहिए उसे लेकर टीवी पर चर्चा है और वर्तमान के जिस मुद्दे को मीडिया में उचित...
Published 10/18/21