रवीश कुमार का प्राइम टाइम : जाति की जनगणना से क्यों भाग रही है मोदी सरकार
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आर्थिक सवालों पर फेल हो चुकी या नए आर्थिक दर्शन की जगह पुराने को ही नया स्लोगन बनाकर अपना काम चला रही भारत की राजनीति को एक शब्दों में परिभाषित किया जा सकता है. राजनीति का भगोड़ा सिस्टम. जिसके तहत हर दल हर नेता मूल सवालों से भाग रहा है. कोई सांप्रदायिकता से लड़ने के बजाए भागने लगता है,शहर में रंगाई पुताई को विकास बता कर उसके पोस्टर लगाने लगता है तो कोई बेरोज़गारी और ग़रीबी के सवालों से भागने के लिए सांप्रायिकता को गले लगाने लगता है. सब भाग रहे हैं लेकिन भागते भागते सब अंत में वहीं पहुंच गए हैं जहां से भागना शुरू किया था.
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भांति-भांति के गोरखधंधों में शामिल अफसरों के सहारे किसी को फंसा देने के मामले भारत में एक नहीं, अनगिनत विश्वगुरु हैं. उनकी कहानियों से दिल दहलता है और बहलता भी है, लेकिन ऐसे अफसरों की तादाद इतनी है कि एक को हटाकर दूसरा लाया जाता है और खेल वही चलता है. आर्यन खान ही नहीं, इनके चंगुल में ऐसे कितने...
Published 10/26/21
जब भी आपको बेरोज़गारी से परेशान कोई युवा मिले, ऐसा कोई मिले जिनकी सैलरी कम हो गई हो या जिनका बिज़नेस नहीं चल रहा हो और सभी पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों से परेशान हों, तो आप उसकी बेचैनी सिर्फ एक लाइन से दूर कर सकते हैं. उसके कान में धीरे से कहिए, कोई दूसरा विकल्प भी तो नहीं है. उसका चेहरा खिल...
Published 10/25/21
बीस हजार करोड़ का 3000 किलोग्राम ड्रग्स पकड़ा गया उसे लेकर कितना कम कवरेज हुआ, छह ग्राम चरस पकड़ा गया उसे लेकर जो कवरेज हो रहा है, पता चलता है कि बीस हजार करोड़ से ज्यादा शाहरुख खान की कितनी वैल्यू है और उस जनता की कितनी कम वैल्यू हो गई है जो आराम से 117 रुपया पेट्रोल भरा रही है, जो कभी 65 रुपया...
Published 10/22/21