रवीश कुमार का प्राइम टाइम : क्या प्रधानमंत्री मोदी तालिबान को आतंकवादी कहेंगे?
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अफगानिस्तान की घटना को दुनियाभर में जिस तरह से समझा जा रहा है. भारत में इसे देखने और समझने की प्रक्रिया भी अब अपने आप में किसी घटना से कम नहीं है. आप अफगानिस्तान और तालिबान के बारे में कुछ भी बात कीजिए, इसे उसी फ्रेमवर्क से देखा और समझा जा रहा है, जिसे घरेलू राजनीति ने तैयार किया है. हिंदू-मुस्लिम और नेशनल सिलेबस के फ्रेम से, जिसमें काबुल से आ रही हर सूचनाओं को कूच दिया जा रहा है. फीट कर के फैलाया जा रहा है.
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जम्मू कश्मीर में क्या हो रहा है, यह जानना होगा तो आप किसी न किसी से पूछेंगे. सेना और पुलिस के बयान से किसी घटना की जानकारी मिलती है लेकिन राजनीतिक तौर पर कश्मीर के भीतर क्या हो रहा है इसकी आवाज़ तो उन्हीं से आएगी जिनकी जवाबदेही है. इतना कुछ हो रहा है फिर भी कश्मीर पर कोई विस्तृत प्रेस कांफ्रेंस...
Published 10/19/21
बहुत जरूरी है कि हम उस उचित स्थान को तय कर दें जिसके न मिलने पर आए दिन राजनीति होती है. तय किया जाना चाहिए कि उचित स्थान का क्या मतलब है और ये कहां पर होता है. इतिहास के जिस मुद्दे को इतिहास की कक्षा में उचित स्थान मिलना चाहिए उसे लेकर टीवी पर चर्चा है और वर्तमान के जिस मुद्दे को मीडिया में उचित...
Published 10/18/21
हरियाणा दिल्‍ली सीमा, सिंघु बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन स्‍थल पर एक शख्‍स की निर्ममता से हत्‍या के मामले के आरोपी निहंगों के दल के एक सदस्‍य ने समर्पण कर दिया है. प्रदर्शन स्‍थल पर शुक्रवार सुबह एक शख्‍स का शव पाया गया था जिसकी कलाई और पैर को निर्ममता से काट दिया गया था. अब सवाल यह उठता है कि...
Published 10/15/21