रवीश कुमार का प्राइम टाइम : क्या गरीब की ही कटेगी जेब, उद्योगपति बस रियायत लेंगे?
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जब भी आपको बेरोज़गारी से परेशान कोई युवा मिले, ऐसा कोई मिले जिनकी सैलरी कम हो गई हो या जिनका बिज़नेस नहीं चल रहा हो और सभी पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों से परेशान हों, तो आप उसकी बेचैनी सिर्फ एक लाइन से दूर कर सकते हैं. उसके कान में धीरे से कहिए, कोई दूसरा विकल्प भी तो नहीं है. उसका चेहरा खिल जाएगा. इसे सुनते ही जो पब्लिक 100 रुपया लीटर पेट्रोल भराने से परेशान थी, 114 रुपया लीटर पेट्रोल भराने लग जाएगी और कहेगी, जाने दीजिए, कोई दूसरा विकल्प भी तो नहीं है.
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Published 12/03/21
जैसे-जैसे पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं, सियासी सरगर्मियां बढ़ रही हैं. रैलियों का दौर चल रहा है. अरविंद केजरीवाल पंजाब में, प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में, तो अखिलेश यादव बीजेपी के गढ़ बुंदेलखंड में तीन दिन से रैलियां कर रहे हैं.
Published 12/03/21
भारत एक 'सीरियस प्रधान' देश है. हम भारतीयों की सीरियसता की खास बात ये है कि हम हर बात को गंभीरता से लेते हैं. हंसने से पहले और हंसने के बाद सीरियस होना, हमारी सीरियसता का अभिन्न अंग है. हंसना दो सीरियसताओं के बीच एक छोटा सा ब्रेक है.
Published 12/02/21